स्वर्णिम कथन ~ आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज
- "भक्ति समर्पण का नाम है। जो समर्पण नहीं कर सकता उसे भक्ति प्राप्त नहीं होती।"
- "मनुष्य अपने कार्यों, विचारों और संस्कारों से ही पहचाना जाता है।"
- "किसी की सहानुभूति पाने की कामना सबसे बड़ी कायरता है।"
- "संदेह मे जीने वाला व्यक्ति जीवन मे सफल नहीं होता।"
- "हँसने से जीवनी शक्ति बढती है।"
- "खुलकर हँसना जीवन मे अमृत का काम करता है। प्रसन्नता जीवन की परेशानी से उत्पन्न होने वाली झुर्रियों से हमें बचाती है।"
- "हमारा जीवन ईश्वर का प्रसाद है। अपनी दुष्प्रवृत्तियों से उस प्रसाद को दूषित न करें।"
- "मन का वेग बड़ा प्रबल होता है। जो व्यक्ति ईस वेग को नियंत्रित कर लेता है वही सद्पुरुष बनता है।"
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